शनिवार, 29 अप्रैल 2017

सृष्टि का आरम्भ इस दिन हुआ था…

अक्षय का अर्थ होता है जो जल्दी से खत्म नहीं होता। अक्षय तृतीय के दिन जो भी शुभ कार्य करते हैं, उन सबका फल बहुत लम्बे समय तक मिलता है। इसलिए इसदिन ज्यादा से ज्यादा शुभ कार्य, भगवान को प्रसन्न करने की चेष्टा इत्यादि करनी चाहिए।

इसी तिथि को सृष्टि का प्रारम्भ हुआ था। सत्-युग का प्रारम्भ भी इसी दिन हुआ था।
इसी तिथि को श्रीधाम पुरी में भगवान जगन्नाथ जी की चन्दन यात्रा का प्रारम्भ होता है, जो की 21 दिन तक चलती है। 

भगवान अपने भक्तों के साथ अद्भुत लीलायें करते हैं। जैसे भगवान जगन्नाथ जी अपने भक्तों से चन्दन का लेप लगवाते हैं, उसी प्रकार एक बार भगवान के महान भक्त श्रील माधवेन्द्र पुरीपाद जी के स्वप्न में आपके द्वारा सेवित श्री गोपाल आए व बोले कि उनके अंगों को गर्मी लग रही है, मलयज चन्दन के लेपन से ये गर्मी दूर हो जाएगी।

प्रभु की आज्ञा पाकर आप प्रेम में विभोर हो गए व गोपाल जी की सेवा में 

उपयुक्त सेवक को नियुक्त करके मलयज चन्दन लेने के लिए पूर्व देश की ओर चल दिये।

मार्ग में आप श्रीअद्वैत आचार्य जी के घर (शान्तिपुर), व रेमुणा (श्रीखीर-चोर गोपीनाथ) भी गये।

कुछ समय बाद आप श्रीजगन्नाथ पुरी पहुँचे। आपने श्रीजगन्नाथ जी के सेवकों तथा भक्त-महन्तों को सारी बात बताई और मलयज चन्दन इकट्ठा करके देने की प्रार्थना की। उनमें से जिनका राज-पुरुषों के साथ सम्बन्ध था, उनके माध्यम से मलयज चन्दन और कर्पूर इकट्ठा कर लिया। 

चन्दन को ढोकर ले जाने के लिए भक्तों ने एक ब्राह्मण तथा अन्य एक सेवक को भी श्रील माधवेन्द्र पुरीपाद जी के साथ भेज दिया।

वापसी में पुनः रेमुणा आये। वहाँ आपने श्रीखीर-चोर गोपीनाथ जी के बहुत समय नृत्य-कीर्तन किया और प्रसाद पाया । (श्रीगोपीनाथ जी ने ही आपके लिए इससे पहले खीर चुराई थी, व खीर-चोर गोपीनाथ कहलाये)

उस रात को मन्दिर में विश्राम कर रहे थे कि श्रीगोपाल स्वप्न में आये व बोले कि इस चन्दन-कर्पूर को घिस कर गोपीनाथ को लेप करो। मैं और वे एक ही हैं। उनको चन्दन का लेप होने से, मुझे शीतलता का अनुभव होगा।
आपने सुबह उठ कर सभी को श्रीगोपाल की बात सुनाई। गर्मी के समय में श्रीगोपीनाथ जी चन्दन-लेप करवाएँगे, सुनकर गोपीनाथ जी के सेवकों को बहुत आनन्द हुआ। आपने अपने साथ आये दोनों सेवकों को, व दो अन्यों सेवकों को चन्दन घिसने के लिए लगाया।
जब तक चन्दन खत्म नहीं हुआ (गर्मी के समय) तब तक श्रीगोपीनाथ जी के श्रीअंग में प्रतिदिन लेपन होता रहा।

श्रील माधवेन्द्र पुरीपाद जी की जय !!!
श्रीगोपाल जी की जय !!!

श्रीखीर-चोर गोपीनाथ जी की जय !!!

भगवान जगन्नाथ जी की जय !!!

चन्दन यात्रा महा-महोत्सव की जय !!!

गुरुवार, 27 अप्रैल 2017

First Gaudiya Institution organized by women devotees

Shree Guru Prapanna Ashram, focusing entirely on women devotees

स्त्री भक्तों के लिए श्री गुरु प्रपन्न आश्रम की स्थापना हुई है। इसकी स्थापना श्री श्रीमद् श्रील पतितपावन गोस्वामी ठाकुर ने की। आप जगद्गुरु श्रील भक्ति सिद्धान्त सरस्वती गोस्वामी ठाकुर के शिष्य हैं।...................

This ashram is an indispensible part of the Gaudiya Vaishnav institutions. But there are certain things that make this organization somewhat special. One of them is that this is the first reported organisation of the Gaudiya institutions that entirely focuses on women devotees.
It was founded by His Divine Grace Shrila Patitpavan Goswami Thakur, one of the disciples of Jagatguru Shrila Prabhupada Bhaktisiddhanta Saraswati Goswami Thakur, with the primary motive of helping the cause of the suffering women and bringing them to the shelter of Lord Shri Krishna.
This ashram is mainly run by the women sevaits and regular weekly classes are organised where women from various localities of Kolkata assemble to take a course on the teachings of Gaudiya Acharyas, The Gaudiya Philosophy and much more.
This is indeed an attempt on behalf of us to distribute the mercy of Lord Shri Gouranga Mahaprabhu to the women devotees so that they too get the privilege of knowing the great Lord, His pastimes, His glories.
Our present Acharya is Shrimati Jayshree Devi
We are currently preparing a preliminary version of
webpage. If you visit the galleries and About Us sections, you will be able to see the pictures of deities. We also have a Facebook page.
And the location of the Kolkata Ashram in Google maps
http://www.vina.cc/2017/03/21/first-gaudiya-institution-organized-women-devotees/

बुधवार, 26 अप्रैल 2017

तुम मेरा सुख चाहते हो या अपना सुख…

एक बार श्रीचैतन्य महाप्रभु जी ने अपने भक्तों से कहा की उन्हें वृन्दावन जाने की बहुत इच्छा है। महाप्रभु जी की तीव्र - उत्कण्ठा को देख कर भक्तों ने उन्हें विजयदश्मी के दिन जाने का परामर्श दिया। भक्तों की इच्छा के अनुसार ही श्रीमहाप्रभु जी ने विजयदश्मी के दिन, वृन्दावन के लिए यात्रा प्रारम्भ की।

राजा प्रतापरुद्र ने जाने के पथ पर अनेक प्रकार से सहायता की।

चित्रोत्पल नदी पार होने पर श्रीराय रामानन्द, महाराज प्रतापरुद्र और 
हरिचन्दन, श्रीमहाप्रभु के साथ चल पड़े।

भगवान श्रीचैतन्य महाप्रभु जी का विच्छेद सहन न कर सकने के कारण श्रीगदाधर पण्डित भी श्रीमहाप्रभु जी के साथ चल पड़े। तब श्रीमहाप्रभु जी ने आपको अपना क्षेत्र संन्यास व्रत छोड़ने के लिए मना किया।

इसके जवाब में श्रीगदाधर पण्डित जी, श्रीमहाप्रभु जी से बोले, 'जहाँ आप हैं, वहीं पुरुषोत्तम धाम (नीलाचल) है । जहाँ तक क्षेत्र संन्यास की बात है -- भाड़ में जाये मेरा क्षेत्र संन्यास्।'

{कुछ समय पहले आपने श्रीपुरुषोत्तम धाम में क्षेत्र संन्यास (पुरुषोत्तम क्षेत्र कभी भी न छोड़ने का व्रत) का व्रत लिया था। तब श्रीमहाप्रभु जी ने आपको श्रीटोटा गोपीनाथ जी की सेवा प्रदान करते हुए यमेश्वर टोटा (अर्थात् यमेश्वर के उपवन) में रहने के लिए निर्देश दिया था }
श्रीमन्महाप्रभु जी ने पुनः श्रीगोपीनाथ जी की सेवा छोड़ने को निषेध किया तो पण्डित जी बोले, 'आपके पादपद्मों के दर्शनों से ही करोड़ों गोपीनाथों की सेवा हो जायेगी।'

श्रीमन्महाप्रभु जी के यह कहने पर कि श्रीगोपीनाथ जी की सेवा छोड़ने में दोष होगा, आपने कहा, 'प्रतिज्ञाभंग और गोपीनाथ जी की सेवा त्याग का जो दोष होगा, वह मेरा ही होगा। आप बस चलने की आज्ञा प्रदान करें। मैं अकेले ही शची माता (श्रीमहाप्रभु जी की माता जी) के दर्शन करने जाऊँगा, 
आपको कोई कष्ट नहीं दूँगा।'

श्रीगदाधर जी की अद्भुत श्रीगौरांग प्रीति को समझने की श्रीमन्महाप्रभु जी के अंतरंग पार्षदों के अतिरिक्त और किसी की सामर्थ्य नहीं है। राग मार्ग का प्रेम आसानी से समझ में नहीं आता। श्रीगदाधर जी महाप्रभु जी के लिए अपनी प्रतिज्ञा, कृष्ण-सेवा, सब कुछ छोड़ने के लिए तैयार हैं। 
कटक में पहुँचने के पश्चात् श्रीमहाप्रभु जी ने श्रीगदाधर पण्डित को बुला कर कहा कि ये तो निश्चय हो गया कि तुम अपना उद्देश्य, प्रतिज्ञा और सेवा छोड़ दोगे तथा मेरे साथ चलने में तुम्हें सुख होता है किन्तु ये बताओ कि तुम मेरा सुख चाहते हो कि अपना सुख चाहते हो? यदि मेरा सुख चाहो तो नीलाचल वापिस चले जाओ। और अब यदि कोई बात बोली तो तुम्हें मेरी शपथ।

श्रील भक्ति बल्लभ तीर्थ गोस्वामी महाराज जी अपनी रचना 'श्रीगौर पार्षद एवं गौड़ीय वैष्णव-आचार्यों के संक्षिप्त जीवन चरित्र' में बताते हैं की श्रीकृष्ण लीला में जो श्रीमती राधा जी हैं, गौर-लीला में वे ही श्रीगदाधर पण्डित गोस्वामी जी हैं।


श्रील गदाधर पण्डित गोस्वामी जी की जय !!!!!!!

आपके आविर्भाव तिथि पूजा महा-महोत्सव की जय !!!!!!

सोमवार, 24 अप्रैल 2017

'विश्वप्रिय आचार्य देव जी का नित्यलीला में प्रवेश''

'विश्वप्रिय आचार्य देव जी का नित्यलीला में प्रवेश''
20 अप्रैल को रात्रि 10:15 बजे अखिल भारतीय श्रीचैतन्य गौड़ीय मठ व World Vaishnav Association के आचार्यदेव परमाराध्य
श्रील भक्ति बल्लभ तीर्थ गोस्वामी महाराज जी ने श्रीहरिनाम 
संकीर्तन के साथ 

नित्यलीला में प्रवेश किया ।

* * पूरे वैष्णव जगत में ये पहला उदाहरण है, जिनके भगवद् धाम प्रस्थान पर लगातार 191 घण्टे दिन-रात संकीर्तन चलता रहा ।
* 20 अप्रैल को महाराजश्री ने रात्रि 10:15 बजे नित्यलीला में प्रवेश किया  
** 21 अप्रैल को उन्हें सुंदर रथ पर विराजित करके कोलकाता से मायापुर लाया गया


*** 21 अप्रैल को सायं 6:30 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक 

तथा 
22 अप्रैल को प्रातः 10 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक ....... उन्होंने लगभग 3 हज़ार भक्तों के द्वारा उच्च संकीर्तन के साथ मायापुर धाम की परिक्रमा की ।

22 अप्रैल को ही दोपहर 1 बजे उन्हें महास्नान कराया गया एवं 2 बजे से 6 बजे तक उनकी समाधि लीला चली ।

मायापुर में प्रातः 9 से 1 बजे तक विरह महोत्सव सम्पन्न हुआ।

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On 20th April 2017 His Divine grace Srila 108 Sri Srimad Bhakti Vallabh Tirtha Goswami Maharaj, entered into eternal pastimes of Sri Sri Radha Krishna in Sri Golok Dham. 

On 21st April His Divine grace came to Sri Dham Mayapur. 10 buses and 8 taxis followed the procession from Kolkata math. 

Devotees from all over the world rushed to Sri Mayapur Dham for Srila Gurudev's Darshan and Maha Samadhi ceremony. 
When the procession entered Sri Dham Mayapur due to divine auspicious arrangement cool breeze and slight drizzling started. 

His Divine grace was welcomed with warm hearts with garlands, Pushpa-Abhishek, & arti. 

All the devotees from all Institutions came to join the procession of His Divine Grace. 
Srila Gurudev went for darshan and was welcomed by all the Gaudiya maths and ISKCON temple in Mayapur with Arti, garlands, etc. 

22nd April, Ekadasi tithi, devotees continued to arrive for Gurudev's Darshan and sewa. 

Srila Gurudev went to various other Gaudiya maths during the procession. His Divine grace was welcomed again by ISKCON temple where many senior ISKCON devotees performed Srila Gurudev's arti. Devotees were showering flowers from top of the entrance gate and devotees in the procession were welcomed by sprinkling rose water. 
Gurudev's procession circulated over ISKCON temple and returned to Sri Chaitanya Gaudiya math, Mayapur. 

Thousands of devotees attended the Maha Samadhi ceremony. 

His Divine grace will always live in our hearts and continue to guide us with His teachings and instructions.










 

शुक्रवार, 21 अप्रैल 2017

परम-आराध्य गुरुदेव ऊँ विष्णुपाद 108 श्री श्रीमद् भक्ति बल्लभ तीर्थ गोस्वामी महाराज

गुरुदेवजी का नित्यलीला में प्रवेश

            परम-आराध्य गुरुदेव ऊँ विष्णुपाद 108 श्री श्रीमद् भक्ति बल्लभ तीर्थ गोस्वामी महाराज जी रात 10-15 बजे भगवान् श्रीराधा-गोविन्दजी की नित्यलीला में प्रवेश कर गये हैं

21 अप्रैल को प्रातः 11-40  पर कोलकाता मठ से मायापुर के लिए  प्रस्थान करेंगे


परसों 22 अप्रैल को दोपहर 11-30 बजे मायापुर मठ में महाभिषेक तथा 12-30  बजे वे समाधि में विराजमान होंगे

His Divine Grace Srila Bhakti Ballabh Tirtha Goswami Maharaj entered into the eternal pastimes of Supreme Lord Sri Krishna on 20 April, 10.15pm.

Samadhi will be in Sridham Mayapur. Following is the schedule of the events: 

21 Apr 2017, Sree Chaitanya Gaudiya Math, Kolkata
07:30 AM : Srila Gurudev will go down to Natya Mandir
11:40 am : Procession to Sridham Mayapur will start

22 Apr 2017, Sree Chaitanya Gaudiya Math, Mayapur
11:30 am : Bathing
12:30 pm : Maha Arati and Samadhi