
आप इतने उच्च कोटि के भक्त थे कि आप जिस स्थान पर श्रीमद् भागवतम् लिखते थे, बारिश होने पर जब उस स्थान पर पानी गिरता, तो उस स्थान पर पानी गिरने पर भी ग्रन्थ गीला नहीं होता था। ग्रन्थ के पन्ने
बिलकुल भी नहीं भीगते थे।
आप श्रीगोकुलानन्द जी की सेवा करते थे। आज भी वो विग्रह वृन्दावन के श्रीगोकुलानन्द मन्दिर में विराजित है।
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