मंगलवार, 17 मई 2022

मैया मोरी, मैं नहीं माखन खाएओ।

 सूरदास जी ने श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं के बारे में बहुत कुछ लिखा है।

एक बार लिखते हैं कि…………………

कन्हैया-- मैया! मैया मोरी! मैं नहीं माखन खाएओ।

(श्रीकृष्ण माखन खाते हुए पकड़े गये हैं और अब मैया को मना रहे हैं वैसे तो सारा संसार ही भगवान का है अतः वे कोई वस्तु कैसे चुरा सकते हैं किन्तु लीला है, भक्तों के प्रेम का रसास्वादन करने के लिए। जैसे भगवान तो सर्वज्ञ हैं किन्तु लीला में ऐसा व्यवहार करते हैं जैसे उन्हें मालूम ही नहीं है। सारी सृष्टि के एकमात्र स्वामी होते हुए भी चोरी की लीला कर रहे हैं बालक की लीला कर रहे हैं।..............

.............एक और बात है कि जिस घर में नन्द-नन्दनन्दन श्रीकृष्ण रह रहे हैं, वहाँ पर श्रीनन्द महाराज जी के 9 लाख गायें हैं जिस बालक के घर पर 9 लाख गायें हों वो भला क्यों माखन चुरायेगा?)

भगवान श्रीकृष्ण अपने भक्तों को सुख देने के लिए विभिन्न लीलायें करते हैं

अतः कन्हैया ने कहा-- मैया! ओ मैया! मैंने माखन नहीं खाया। अब तू ही बता कि मैं चोरी कब करूँगा? सुबह-सुबह तो खाना खिला कर मुझे जंगल में भेज देती है, गो-चारण करने के लिए और सारा दिन तो मैं वहीं रहता हूँ मैं भला चोरी कब करूँगा? 

मैया को कोई जवाब न देते देख, श्रीकृष्ण ने दूसरी युक्ति बोली-- मैया, आप ही बताओ, मैं एक छोटा सा बालक हूँ नन्हें_नन्हें मेरे हाथ, इतनी ऊपर छींका लगा हुआ है, उसमें घड़ा है जिसमें माखन रखा है, तो भला मैं कैसे माखन खा सकता हूँ? मैं छींके तक कैसे पहुँच सकता हूँ?

मैया ने कन्हैया के मुख पर लगे माखन की ओर इशारा करते हुए कहा-- अच्छा, लाला ये तेरे मुख पर जो माखन लगा है………।

कन्हैया (भोला सा मुख बना कर) -- मैया, ये तुम क्या बोल रही हो? मेरे सखा लोग बहुत होशियार हैंमुझे फंसाने के लिए मेरे मुख पर ज़बरदस्ती माखन लगा दिया है। आप तो मैया हो, मन से कितनी भोली हो। इन्होंने मेरी शिकायत लगाई है। कहाँ इनकी बातों में आ जाती हो? तेरे को तो ऐसे ही घुमा देते हैं ग्वाल-बाल। इन्होंने मेरे मुख पर माखन लगा दिया और इन्होंने ही शिकायत लगा दी। अच्छा ये ले, गैया को चराने का डंडा, ये ले कम्बल जो तूने मुझे दिया था……इतने से माखन के लिए तू मुझे इतना सता रही है।

मैया हँस पड़ी व बोली-- लाला तू कैसी-कैसी बातें बोलता रहता है और मैया ने अपने लाला को गले से लगा लिया।



गुरुवार, 12 मई 2022

श्रीकृष्ण ने अपने ही घर में से मक्खन को चुराया।

 श्रीकृष्ण जब कुछ बड़े हुए तो घुटनों के बल चलने लगे और कभी-कभी चरणों के बल पर भी चलते।

एक दिन मैया से चोरी-चोरी घुटनों के बल चलते-चलते घर में ही एक कमरे में घुस गए, जहाँ पर ढेर सारा मक्खन रखा हुआ था।

धीरे-धीरे मखन के बर्तन के पास पहुँचे, उसी से सहारे से खड़े हुए और हाथ बर्तन के अन्दर डाल लिया। मक्खन को ऊँगली से निकाला और दरवाज़े से दूसरी ओर मुख करके खा लिया, चुपके से। मुख इसलिए घुमा लिया ताकि कोई उन्हें मक्खन खाते हुए न देख ले।

ऐसे में एक बार मक्खन वाले कमरे में मैया थीं तो नन्हें कृष्ण गोपियों के कमरे में चले गए। वहाँ के दीपकों को बुझाने लगे, जिससे अन्धेरा सा हो गया। चारों ओर फैल रहे इस अन्धेरे को देख मैया भी बाहर चली आईं देखने के लिए कि अन्धेरा क्यों हो रहा है?

इधर बाल-कृष्ण चुपके से माखन वाले कमरे में चले गये और माखन को खा लिया।

फिर तेजी से अपने कमरे के बिस्तर पर आकर लेट गये जैसे कुछ हुआ ही न हो।

एक बार ऐसे ही माखन चोरी करके खाने लगे तो सामने खम्बे की ओर दृष्टि चली गई। श्रीनन्द जी के भवन में सभी खम्बे मणियों से जड़े थे। उन मणियों से प्रकाश आता था जिससे कमरे में रोशनी रहती थी। उन मणिमय खम्बे में श्रीकृष्ण ने देखा अपना प्रतिबिम्ब। वैसे तो जानी-जान हैं! सब कुछ जानते हैं! फिर भी बालक की लीला कर रहे हैं>

अपनी छाया को देखकर कहने लगे-- तुझे तो मैं जानता हूँ, शायद। ले तू भी मक्खन खा ले।

जब उस छाया ने मक्खन नहीं खाया तो कहने लगे-- अच्छा, कोई बात नहीं, मेरी मैया को नहीं बताना कि मैं मक्खन खा रहा था, नहीं तो वो मुझे बहुत डाँटेगी।



गुरुवार, 5 मई 2022

अब यह धूल तू कहाँ से लगवा कर आया है?

 वृज में यशोदा नन्दन श्रीकृष्ण वृज में भक्तों के साथ आनन्द से रह रहे हैं।

एक बार, श्रीकृष्ण खेलने लगे, और खेलते-खेलते, धरती पर लोट_पोट हो गए। जब लोट-पोट हो गये तो सारी रज शरीर पर लग गई। उठे और धीरे-धीरे, चलते हुए मैया के पास चले आये। भीतर से डर भी रहे थे कि मैया डांटेगी।

यशोदा मैया ने देखा अपने लाला को कि यह मिट्टी से भरकर आ गया है। हल्का सा प्यार भरी डाँट के साथ मैया ने कहा-- लाला! यह क्या किया तूने? अभी-अभी तुझे नहला-धुला कर तैयार किया था। अब यह धूल तू कहाँ से लगवा कर आया है? बोल!  किसने कहा था लोट-पोट होने के लिए, पक्की बात है कि तू मिट्टी में खेल रहा होगा।

श्रीकृष्ण तो सभी कलाओं में सम्पूर्ण हैं..................

मैया की डांट सुनकर ऐसा भोला चेहरा बनाया कि मैया बरबस ही हँस पड़ी। उनको अपने लाला के ऊपर प्यार उमड़ आया।

मैया उन्हें पुनः नहलाने ले गईं!




बुधवार, 27 अप्रैल 2022

हे धरणी! तुम धर्य धारण करो..................

यशोदानन्दन श्रीकृष्ण अपने बचपन की लीलाओं से वृजवसियों को इतना आनन्द देने लगे कि सभी का ध्यान श्रीकृष्ण में ही रहता इधर श्रीकृष्ण वृजवासियों के लिए ही वहाँ रह रहे थे।

हालांकि भगवान श्रीकृष्ण सर्वशक्तिमान हैं उनके पास सभी प्रकार के ऐश्वर्य हैं उन्हें किसी भी वस्तु की ज़रूरत नहीं है किन्तु वृजवासियों का ऐसा प्रेम है, उनके प्रति कि केवल उनके प्रेम के लिए भगवान वहाँ रह रहे हैं  वहाँ इतना प्रेम है कि भगवान का ऐश्वर्य भी उस प्रेम के आगे छुप जाता है।

भगवान अपना ऐश्वर्य यशोदा मैया को, श्रीनन्द बाबा जी को तो दिखाते ही थे, गोपियों को भी कभी-कभी दिखाते थे, लेकिन सरल गोपियाँ समझ नहीं पाती थीं

अपने कृष्ण प्रेम के खोई हुई गोपियाँ उनके ऐश्वर्य को समझ ही नहीं पातीं

एक बार श्रीकृष्ण सो रहे थे। आस-पास गोपियाँ बैठी हैं, और उन्हें देख रही हैं, स्वप्न में श्रीकृष्ण बोल उठे-- हे धरणी! तुम धर्य धारण करो। कुछ देर और शान्ति रखो। मैं तुम्हारा भार जल्दी खत्म कर दूँगा।श्रीकृष्ण को ऐसा बोलते सुन, सभी गोपियाँ चौंकीं व उनकी ओर देखने लगीं कि लल्ला, ये क्या बोले जा रहा है?

श्रीकृष्ण ने फिर कहा-- मैं अभी उस दुष्ट कंस को गिरा दूँगा, मार दूँगा। तुम चिन्ता न करो।

सभी गोपियाँ हैरान हो गईं कि ये क्या बोल रहा है?

उन्हें समझ नहीं आया कि वे क्या करें, मैया को बुलायें अथवा क्या करें?

इतने में श्रीकृष्ण मुस्कुरा दिये। भक्त को ज्यादा देर परेशान नहीं रखते भगवान्। उसको परेशान देखकर भगवान तुरन्त उपाय कर देते हैं

श्रीकृष्ण की मुस्कुराहट में ही सभी खो गईं और भूल गईं कि लाला, अभी-अभी क्या बोल रहा था?

ऐसा प्रेम उनका भगवान के लिए, कि उनके रूप में ही खो गईं

कभी-कभी श्रीकृष्ण कुछ ऐसी लीला करते कि उन्हें बहुत भूख लगी है। वैसे तो मैया को उनकी चिन्ता रहती, अपने लाला को खिलाने की, दूध पिलाने की किन्तु कभी-कभी श्रीकृष्ण उनके स्नेह को पाने के लिए लीला करते कि उनको भूख लगी है।

जब भूख लगती तो मैया सारे काम छोड़ कर लाला को दूध पिलाने लगती। श्रीकृष्ण मैया का अपने प्रति प्रेम देखकर इतने खुश होते कि उनकी गोद में लेटे-लेटे कभी अपने चरणों के अगले हिस्से को आगे-पीछे करते, कभी हाथों को तो कभी आँखों से बताते कि मैं बहुत खुश हूँ

अपने लाला को खुश देखकर मैया भी खुश हो जाती और उनकी बलाएं उतारने लगतीं





गुरुवार, 21 अप्रैल 2022

ऐसा वात्सल्य माता यशोदा जी का श्रीकृष्ण के लिए

सारी कलायें, सारे गुण, सारे ऐश्वर्यों की परिपूर्णतम् मात्रा से भरे हैं---- यशोदानन्दन भगवान श्रीकृष्ण।

सर्व-शक्तिमान हैं! हर प्रकार का ऐश्वर्य है उनके पास। किन्तु वृज की लीलायों में भगवान का इतना ऐश्वर्य होते हुये भी वृजवासियों को उनका ऐश्वर्य नहीं दिखता। भगवान सर्वशक्तिमान हैं, सब कुछ कर सकते हैं, किन्तु वृजवासियों के प्रेम के आगे भगवान का ऐश्ववर्य छुप जाता है।

मैया यशोदा जी को भगवान श्रीकृष्ण के लिए इतना प्रगाढ़ प्रेम है, जिसकी कोई सीमा ही नहीं है।

उन्हें श्रीकृष्ण के मंगल की ही चिन्ता रहती है। वे यही सोचती हैं कि मेरा लाला इतना सुकुमार, सुकोमल है, भोला है इसकी रक्षा हर प्रकार से होनी चाहिये। इसे कहीं कुछ हो ना जाये।

अपनी विभिन्न लीलायों से भगवान श्रीकृष्ण कभी-कभी बताते भी हैं कि मैं कौन हूँ किन्तु यशोदा मैया को समझ में ही नहीं आता था। उनका वात्सल्य इतना ज्यादा है कि वे अपने लाला को केवल अपना पुत्र ही मानती हैं

जैसे , एक बार, कन्हैया सोने की लीला कर रहे थे और मैया यशोदा जी उन्हें निहार रही थीं स्वप्न में श्रीकृष्ण बोल उठे -- हे शम्भु! आओ, आपका स्वागत है, मेरी दाईं ओर बैठिये, हे ब्रह्मण! आपका स्वागत है, मेरी बाईं ओर बैठिये, हे कार्तिकये! कुशल से तो हो, सब ठीक है, हे इन्द्र! आपका क्या हाल है,  हे कुबेर! बहुत दिनों से आपको देखा नहीं? इस प्रकार से श्रीकृष्ण कुछ-कुछ बोलने लगे

यशोदा मैया भी सुन रही थीं पहले तो हैरान हुईं कि मेरा लाला सपने में बोल रहा है। लेकिन जब सुना कि क्या बोल रहा है तो वे सोचने लगीं कि ये क्या बोले जा रहा है?

वे घबरा गईं कि मेरा लाला ऐसे नाम कैसे ले सकता है? वे घबरा गईं उन्हें समझ में ही नहीं आया कि वे क्या करें?

अचानक झटके से अपने लाला के माथे को सहलाने लगीं और कहने लगीं-- लाला, लाला! ऐसे नहीं बोलते। ऐसे नहीं कहते। ऐसा नहीं बोलना चाहिए।

तभी उन्हें लगा कि हो सकता है कि कोई अला-बला-भूत मेरे बच्चे के ऊपर आ गई है, इसकी उससे रक्षा करनी पड़ेगी।

वात्सल्य रस से भरी हुई माता, श्रीकृष्ण के आस-पास थुत्कार करती हुईं, प्रार्थना करने लगीं

कितनी अद्भुत बात है कि जो सारे ब्रह्मण्डों के रक्षक हैं, सबके पालक हैं, उनकी रक्षा का उपाय माता यशोदा कर रही हैं, ऐसा वात्सल्य माता यशोदा जी का श्रीकृष्ण के लिए।