जो बोओगे, वही काटोगे
(द्वारा: श्रीश्रीमद्भक्ति बल्लभ तीर्थ गोस्वामी महाराज)
एक समय की बात है, एक राजा था जिसका प्रधानमंत्री एक महान भक्त था | वह हमेशा अन्यों को सान्त्वना प्रदान करता और जो व्यक्ति अपनी सांसारिक समस्याएं लेकर उसके पास आता वह उन्हें निश्चिन्त करने के लिये कहा करता, " आपको चिंतित या निराश नहीं होना चाहिये । आप नहीं जानते कि आपने अपने पिछले जन्मों में क्या किया था और न ही यह जानते हो कि भविष्य में क्या करोगे, इसलिए अपनी वर्तमान हानि को देखकर आपको निराश नहीं होने चाहिये | हो सकता है आपके साथ इससे भी बुरा होना था किन्तु श्री कृष्ण कि कृपा से वह कम हो गया | यह सब मंगल के लिए हो रहा है, निराश मत होओ |"
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| श्रील भक्ति बल्लभ तीर्थ गोस्वामी महाराज |
एक बार राजा अपने प्रधानमंत्री और अन्य सैनिकों के साथ जंगल में शिकार करने गया | प्राचीन समय में क्षत्रिय जंगल में शिकार के लिए जाया करते थे | जंगल में घूमते समय राजा और प्रधानमंत्री सैनिकों से अलग हो गए | जब राजा और मंत्री जंगल में भटक रहे थे तब राजा ने एक जानवर को देखा। राजा ने उसे मारने के लिए बाणअ चलाया। वह बाण राजा के अंगूठे से पार हो गया और उसकी उंगली कटने से अत्यधिक खून बहने लगा | अत्यंत दर्द के कारण वह अपना दुःख व्यक्त करते हुए कहना लगा, "मुझे हमेशा युद्ध करना होता है, मेरा अंगूठा धनुर्विद्या के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है जो अब कट गया है, यह एक बहुत बड़ा नुकसान है |" मंत्री ने राजा को सान्त्वना प्रदान करते हुए कहा, "आप यह नहीं जानते कि पिछले जन्म में आपने क्या किया और भविष्य में आप क्या करेंगे, इससे भी बड़ी समस्या हो सकती थी किन्तु श्री कृष्ण कि कृपा से वह कम हो गयी | इसलिए आपको चिंता नहीं करनी चाहिए |"
राजा इससे क्रुद्ध हो गया व बोला, " मेरी उंगली कट गयी है और इससे अत्यधिक खून बह रहा है | यह मेरे लिए एक बड़ा नुकसान है किन्तु तुम कह रहे हो कि भगवान कि कृपा से जो हुआ मेरे मंगल के लिए हुआ | तुम मुझे परामर्श दे सकते हो लेकिन यदि तुम्हे पीड़ा कि अनुभूति हो और मैं तुम्हे इसी प्रकार राय दूँ तो तुम क्या सोचोगे ? मंत्री ने कहा, "यह बात सबके लिए उचित है | श्री कृष्ण सबका ध्यान रखते हैं | एक बड़ा नुकसान होने से बच गया |" राजा क्रोध में था और उसने सोचा, "मैं इसे अवश्य ही सबक सिखाऊंगा |"
राजा मंत्री के साथ जंगल में चलता रहा । कुछ दूर जाने पर उसने झाड़ियों और घास से ढका एक कुआँ देखा | मंत्री को लेकर राजा कुएं के पास गया और अचानक से उसने मंत्री को कुएं में धक्का दे दिया | राजा बोला, "भगवान कि कृपा से जो भी हुआ तुम्हारे मंगल के लिए हुआ |"
मंत्री ने कहा, " भगवान कि इच्छा के बिना आप किसी को कुएं में धक्का नहीं दे सकते | यह भगवान कि ही इच्छा थी कि आपने मुझे धक्का दिया | मेरा विश्वास करो ! क्योंकि भगवान मंगलमय हैं और वे जो करते हैं मंगल के लिए करते हैं |"
राजा ने चुनौती दी, "कहाँ है तुम्हारे भगवान ? मैं यहाँ हूँ और तुम वहाँ ? कहाँ हैं तुम्हारे भगवान और यदि मैं इस स्थान से चला जाऊं तो क्या वह तुम्हे बचायेगा ?"
मंत्री ने कुएं से उत्तर दिया, " यदि श्री हरि किसी कि रक्षा करते हैं तो उसे कोई नहीं मार सकता और यदि हरि किसी को मारना चाहते हैं तो कोई उसकी रक्षा नहीं कर सकता | किसी में इतनी शक्ति नहीं है |"
