क्या होती है श्रद्धा ?
(द्वारा: परपूज्यपाद नित्यलीलाप्रविष्ट ॐ विष्णुपाद १०८ श्रीश्रीमद्भक्तिवेदान्त स्वामी महाराज)
एक बार नारद जी को किसी ब्राह्मण ने रोका व पूछा, 'क्या आप ईश्वर से भेंट करने जा रहे हैं ? क्या आप उनसे पूछेंगे कि मुझे कब मुक्ति मिलेगी? ' नारद जी ने उसकी बात मानते हुए कहा, 'अच्छा, मैं उनसे पूछ लूँगा I
ज्योंही नारद जी आगे चले, उन्हें एक पेड़ के नीचे बैठा एक मोची मिला I उसने नाराद मुनि से उसी तरह पूछा I जब नारद मुनि वैकुण्ठ लोक पहुँचे तो उन्होंने उन दोनों की इच्छा-पूर्ति के लिए श्री नारायण (ईश्वर) से उनकी मुक्ति के विषय में पूछा I श्री नारायण ने उत्तर दिया, 'इसा शरीर को त्याग करने के बाद मोची मेरे पास यहाँ आयेगा I ' तब
नारद मुनि ने पूछा, 'और वह ब्राह्मण ?'
'उसे तो अनेक जन्मों तक वहाँ रह्ना होगा। मुझे पता नहीं वह कब आ पायेगा।'
![]() |
| श्रील भक्तिवेदान्त स्वामी महाराज |
श्रीनारद मुनि को आश्चर्य हुया और अन्त में उन्होंने कहा, 'मैं इस रहस्य को समझ नहीं पाया।'
श्रीमन्नारायण ने कहा, 'इसे तुम देखोगे। जब वे तुमसे पूछें कि मैं धाम में क्या कर रहा था तो उनसे कहियेगा कि मैं सुई के छेद में हाथी डाल रहा था।'
जब श्रीनारद मुनि पृथ्वी पर लौटे और ब्राह्मण के पास गये तो ब्राह्मण ने कहा, 'क्या आपने भगवान से भेंट की? वे क्या कर रहे थे?' श्रीनारद जी ने उत्तर दिया,'वे तो सुई के छेद में हाथी डाल रहे थे।' ब्राह्मण ने कहा, 'मैं ऐसी अविश्वसनीय बातों को नहीं मानता।'
श्रीनारद को समझते देर न लगी की इस आदमी की भगवान में तनिक भी श्रद्धा नहीं है। इसे केवल कोरा किताबी ज्ञान है। तब नारद मुनि मोची के पास गये। उसने पूछा, 'क्या आप भगवान के यहाँ से हो आये? कृपया बताइये कि वे क्या कर रहे थे?' श्री नारद जी ने उत्तर दिया, 'वे सुई के छेद में हाथी डाल रहे थे।'
