प्रश्न : यदि श्रीकृष्ण-लीला जड़ प्रकृति से परे है , तब आज से ५००० वर्ष पूर्व उन्होंने इस जड़ जगत में लीला को कैसे सम्पादित किया ?
उत्तर : श्रीकृष्ण-लीला निश्चित रूप से जड़ इन्द्रियों की पहुँच से बाहर है | किन्तु श्री कृष्ण की अचिन्त्य शक्ति के प्रभाव से जड़ातीत लीला जड़ जगत में प्रकट होती हैं | जड़ जगत में प्रकट होने पर भी वह जड़ जगत के अन्तर्गत नहीं होती |
श्री कृष्ण लीला के दो रूप हैं
1) प्रकट ( जड़ जगत में दृष्टि गोचर )
2) अप्रकट लीला (अध्यात्मिक जगत में दृष्टि गोचर )
दोनों ही अवस्थाओं में श्रीकृष्ण-लीला दिव्य होती हैं |
श्री कृष्ण लीला दिव्य श्रीवृन्दावन धाम की लीला है | श्रीकृष्ण अपनी अहैतु की कृपा से इसे इस जगत में तथा शुद्ध भक्तों के हृदय में प्रकट करवाते हैं।
किन्तु संसार में प्रकटित होने पर भी, भौतिक बुद्धि वाले मनुष्य उस कृष्ण लीला का चिंतन नहीं कर पाते , बल्कि उसमें अनेक दोष देखेते हैं | शुद्ध भक्तिमय बुद्धि वाले जीव ही सच को जान सकता हैं |
जब कोई जीव इस दोष पूर्ण जड़ जगत से मुक्त होता है तब वह श्री कृष्ण लीला की तरफ आकर्षित होता हैं | श्री कृष्ण - तत्व को समझे बिना श्रीकृष्ण लीला रस का आस्वादन नहीं होता।
(द्वारा: श्रील भक्ति विनोद ठाकुर - वैष्णव सिद्धान्त माला)

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